तुम चले जाओगे तो
छनिक खुशियों का एक समारोह
कहकहो की एक नुमाइश
छेडछाड की एक कॉन्फ्रेंश
एक फाका मस्ती
चोराहो पर कॉलेज के वक़्त
रोज तुम्हारा इन्तजार
बात-बात में उलझ जाना
कौन झाड़ेगा फिर
दर्पणों की धूल?
कौन सवरेगा फिर
किसी के लिए?
कितने सारे ठाठ
समाप्त हो जायेंगे
और भी बहुत कुछ है
अन्तरंग उनके हमारे मध्य
जो समाप्त हो जायेगा
मगर इतनी सरलता से नहीं..........
छनिक खुशियों का एक समारोह
कहकहो की एक नुमाइश
छेडछाड की एक कॉन्फ्रेंश
एक फाका मस्ती
चोराहो पर कॉलेज के वक़्त
रोज तुम्हारा इन्तजार
बात-बात में उलझ जाना
कौन झाड़ेगा फिर
दर्पणों की धूल?
कौन सवरेगा फिर
किसी के लिए?
कितने सारे ठाठ
समाप्त हो जायेंगे
और भी बहुत कुछ है
अन्तरंग उनके हमारे मध्य
जो समाप्त हो जायेगा
मगर इतनी सरलता से नहीं..........