रहना तो यहीं है कहीं जाना तो नहीं है
घर ही तो है मुसाफिरखाना तो नहीं है
औरों के लिए ही सही मुस्कुराओ तो मगर
इन हँसते चेहरों को रुलाना तो नहीं है
बातें अपने वजूद में पड़ती दरार की
छुपाना है सबसे इन्हें बताना तो नहीं है
रिश्ते कांटो की तरह चुभने लगे अगर
पतझर के फूलों सा बदल जाना तो नहीं है.