Sunday, February 19, 2012

Fatehpur Train Incident


दर्द पराया भी अपना होता है
                                             इतना अपना
जैसे अस्थियों से चिपकी मज्जा
काँटों पर सजे फूल के अहसास सा
बादलों के संग वाष्प सा
वृक्षों के साथ पत्तो सा
जीवन पतझर में बसंत जैसा
                             कितना अपना होता है
दुर्घटना, कोई भी हो, कही  भी
क्षत- विक्षत लाशें और
खून से लथपथ चेहरे
माँ से बिछुड़े मासूम  देखकर
हज़ारों मील दूर, फिर भी
कितने नजदीक से लगते है
हमारी सुप्त संवेदनाये
स्वत: ही वहां झुक जाती है
साँसे कुछ रुक जाती है
क्योंकि दर्द जोड़ता है
                                   हमें एक-दूसरे  से

No comments:

Post a Comment