Tuesday, February 28, 2012

geet nahi likh sakta

नर्गिसी आँखों के, संदली बाहों के
प्रेम में आहों के,व्यक्तिगत  पीडाओं के
पुष्प झरने के, स्वपन मरने के
भीगी भीगी बरसातों के
विरह की लम्बी रातों के
कुछ विदा क्षणों के
कुछ जुदा क्षणों के
छाव के कभी धूप के
रंग के कभी रूप के
रुसवाई के
तनहाई के
मन मीत के
झूठी प्रीत के
                      .........गीत लिखे है मैंने .........
चून घोलकर पीने वाले बचपन की
बिन ब्याही बेटी बैठी पचपन की
कूड़े को बीनते बीनते
टुकडो को छीनते छीनते
जूठी पत्तल सकोरे चाटने वाले
एक कुर्ते को चार जगह बाटने वाले
आह ! कितनी तकलीफ देह
कोशिश है जीने की .........
नाउम्मीद पुरनम आँखों में

                                                          
जमींदोज उड़ न सकी पाँखो में
..................................................परवाज  नहीं ला सकता मैं
उजड़े दिल की धड़कन के
कर्कश साँसों की सरगम के
.................................................गीत नहीं गा सकता मैं
गीत नहीं लिख  सकता मैं .......

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